कोरोना संकट एवं हमारा दायित्व
* निबन्ध * कोरोना परिस्थिति और हमारा दायित्व परेशानियों के कोष्टक ने महामारी काल में आम जनमानस को चारों ओर से घेर कर रख लिया ।हम भारतीय मजबूत संकल्पता के साथ जिम्मेदारियों के वृत्त से सूर्य के प्रकाश की भांति एक अनन्त ऊर्जा मयी घोर तमस को मिटाने की किरण की तलाश करने में जुटे है । लफ़्ज़ में हुंकार बिठा लहजो में खुद्दारी रख जीना की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रखना। सबके सुख में शामिल हो, दुःख में साझेदारी बनाए रख, श्री मदभागवत गीता पढ़ा युद्ध निरंतर जारी रख। देश में कोरोना काल के समय राष्ट्रीय कवि डॉ शिवओम अम्बर की इन पंक्तियों से विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति मिलती है जो कि आध्यत्मिक दृष्टि से जीवन का एक सच है। दुनिया में विश्व युद्ध के दौरान भी देश में ऐसी परिस्थिति नहीं छाया थी, जैसे कि चीन देश से उतपन्न हुई कोरोना बीमारी से आई। कोरोना बीमारी ने देखते ही देखते रौद्र रूप धारण कर लिया, कारणवश देश में भयाभय स्थिति उतपन्न हो गई। देश मे कोरोना रोगियों का आंकड़ा नित दिन नई उचाईयों को छूने जा रहा है, 1.30 करोड़ आवादी वाले भारत मे...