नाटक कलारी (klari)
'कलारी नाटक' जैसा कि आप सभी नाम से ही परिचित होंगे कि साधारणतः उत्तर प्रदेश के अनेकों जिलों में 'ठेका देसी शराब' को आंचलिक भाषा, बोली में 'कलारी' कहा जाता है । नशा मुक्ति अभियान पर आधारीत 'कलारी नाटक' के मंचन में अत्यधिक शराब पीने से घरों में रोजाना घटने वाली घटनाओं/ ग्रह क्लेशों से है । पात्र 'शमशेर' किस तरह से नशे में पत्नी 'बिंदिया' से मारपीट कर उससे शराब के लिए पैसे मांगता है , यहीं नहीं नशे की लत में गरीब मजदूर वर्ग किस तरह से खुद को मौत की गर्त में ढकेलता चला जाता है यह दर्शाया गया है, साथ ही अपने दोस्त 'बिरजू' और 'कलुआ' की गलत संगत में पढ़ कर घर परिवार की पूंजी/ वस्तुओं को जुआ, शराब में बर्बाद कर देता है । नाटक का अंतिम दृश्य ह्रदय विदारक है जिसमें जहरीली शराब पीने की बजह से पात्र 'शमशेर'की तड़प - तड़प कर मौत हो जाती है । उपरोक्त नाटक के मंचन में कुशल अभिनय कौशल रखने वाले बालीबुड फ़िल्म कलाकर नक्श थियेटर के डायरेक्टर 'अमित सक्सेना' के नेतृव म...