फर्रुखाबाद की बसन्त पँचमी पर विशेष --
बचपन में "बसन्त पंचमी" को लेकर खास उत्साह रहता था, करीब एक महीने पहले से ही हम लोग बसन्त" की तैयारी में जुट जाया करते थे। कितने खूबसूरत हुआ करते थे वे दिन,"बसन्त पंचमी" का पर्व फर्रुखाबाद वासियों के लिये विशेष होता है,वो इसलिये क्योंकि यहाँ "पतंगबाजी" के शौक से गहरा सम्बन्ध है। 'हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि "पतंगबाजी" की शुरूआत यहाँ बसन्त पंचमी पर कैसे हुई? लेकिन बचपन से लेकर अभी तक देखा है इस पर्व को उमंग और उत्साह के साथ "पतंग उत्सव" के रूप में ही मनाया जाता है। जैसे "होली" रंगों के लिये, "दिवाली" पटाखों के लिये,"रक्षा बंधन" राखी के लिये, ठीक इसी तरह "पतंग" के लिये "बसन्त" विशेष पर्व के रूप में मनाया जाता है । उन स्वर्णिम दिनों की बात करूँ तो आज भी याद हैं कि एक -एक "पतंग" के लिये कितना लड़ते- झगड़ते, कूदते -फांदते गाली देते गालियाँ खाते, कभी पिता जी की फ़टकार तो कभी माँ का प्यार, पतंगबाजी" करने में इतना लीन की खाने - पीना से चिंतामुक्त , प्रातः काल...