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Showing posts from February, 2021

फर्रुखाबाद की बसन्त पँचमी पर विशेष --

 बचपन में "बसन्त पंचमी" को लेकर खास उत्साह रहता था, करीब एक महीने पहले से ही हम लोग बसन्त" की तैयारी में जुट  जाया करते थे।  कितने खूबसूरत हुआ करते थे वे दिन,"बसन्त पंचमी" का पर्व फर्रुखाबाद वासियों के लिये विशेष होता है,वो इसलिये क्योंकि यहाँ "पतंगबाजी" के   शौक से गहरा सम्बन्ध है।  'हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि  "पतंगबाजी" की शुरूआत यहाँ बसन्त पंचमी पर कैसे हुई? लेकिन  बचपन से लेकर अभी तक देखा है इस पर्व को उमंग और उत्साह के साथ "पतंग उत्सव" के रूप में ही मनाया जाता है।  जैसे "होली" रंगों के लिये, "दिवाली" पटाखों के लिये,"रक्षा बंधन"  राखी के लिये, ठीक इसी तरह  "पतंग" के लिये "बसन्त" विशेष पर्व के रूप में  मनाया जाता है । उन स्वर्णिम दिनों की बात करूँ तो आज भी याद  हैं कि एक -एक "पतंग" के लिये कितना लड़ते- झगड़ते, कूदते -फांदते  गाली देते गालियाँ  खाते, कभी पिता जी की फ़टकार तो कभी  माँ का प्यार, पतंगबाजी" करने में इतना लीन की खाने - पीना से चिंतामुक्त , प्रातः काल...

प्राण त्याग भारती के लाल नहीं मरते

प्राण त्याग भारती के लाल नहीं मरते  जनपद के युवा कवि दिलीप कश्यप कलमकार को काव्यरत्न  सम्मान से किया गया सम्मानित । फर्रुखाबाद -कानपुर नगर की साहित्यिक संस्था साहित्यलोक द्वारा एक विराट काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया इस दौरान जनपद के युवा कवि दिलीप कश्यप कलमकार को काव्यरत्न सम्मान देकर  सम्मानित किया गया । 14 फरवरी को कानपुर के आशीर्वाद गेस्ट हाउस में आयोजित काव्य गोष्ठी में  फर्रुखाबाद से दिलीप कश्यप कलमकार ,हाथगाव से  शिवम हथगामी,अकबरपुर से गौरब अवस्थी,उन्नाव से हास्य कवि अनुभव अज्ञानी, सीतापुर से  पवन कुमार, फतेहपुर की कोमल द्विवेदी, आदि ने काव्य पाठ किया  । कार्यक्रम में मशहूर शायर डॉक्टर वेद प्रकाश संजर मुख्यातिथि व व्यंगकार  श्रवण शुक्ल विशिष्ट अतिथि  रहे ।  कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर प्रमिला पाण्डेय ने की ।  फर्रुखाबाद के दिलीप कश्यप ने  पुलवामा में शहीद हुए  वीर जवानों  को नमन करते हुए, "मन में उमंग लिये जीत की तरंग लिये, त्याग प्राण भारती के लाल नहीं मरते ।,, छन्द पड़ा  तो वहीं  उन्नाव के  हा...