समय का आभास कराता फर्रुखाबाद के चौक का घण्टाघर
विश्व धरोहर सप्ताह पर विशेष,
समय का आभास कराता फर्रुखाबाद के चौक का घण्टाघर
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फर्रुखाबाद-नगर के मध्य में स्थित त्रिपोलिया चौक का घण्टाघर हमारी ऐतिहासिक धरोहरों में से एक हैं,चौक घण्टाघर में लगी घड़ी आज भी लोगो को समय का आभास कराती रहती है ।
कहते है समय के काल चक्र को कोई रोक नहीं
सकता
ज्यों-ज्यों समय बीतता जा रहा है त्यों -त्यों यह ऐतिहासिक धरोहरें अपने अस्तित्व को खोती जा रही हैं ।
आलम यह है कि नगर के भीड़ -भाड़ वाले इलाके में पोस्टरों बैनरों से अतिक्रमण कर इन पर अपना कब्जा कर रखा है ।
समय का पहिया घूमता गया देश पर अंग्रेजो ने साम्राज्यवाद स्थापित अपना कब्जा जमा लिया अंग्रेजी आक्रांताओ ने देश को गुलामी की जंज़ीरों में जकड़ कर रख लिया ।
समय ने जब पुनः करबट बदली तो अंग्रेजो को देश छोड़ कर जाना पड़ा ।
बर्ष 1934 में तत्कालीन गवर्नर सर मॉरिस हेलिट ने इस घण्टाघर का शिलान्यास किया था ।
यह घण्टाघर स्वतन्त्रता सेनानी लाला मैकू लाल की स्मृति में बनबाया गया था ।
पहले के समय में कम्प्यूटरी युग का अभाव होने के कारण लोगो के घरों में वक्त देखने के लिए घड़िया नहीं हुआ करती थी । लोग इसी घण्टाघर में समय देखकर अपनी दिनचर्या तय किया करते थे, इसकी गूंज सुनकर लोग आज भी समय का आभास करते है ।
इसी घण्टाघर के नीचे एक ऐतिहासिक पटिया भी हमारी धरोहर की साक्षी है। कहा जाता है यह पटिया नगर की राजनीति का मुख्य केंद्र भी रही है जनपद की राजनीति से जुड़े बड़े -बड़े नेताओ ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की हैं ।
इतना ही नहीं आजादी से पूर्व देश के क्रांतिकारी इसी स्थान पर बड़ी -बड़ी सभायें कर आजादी का बिगुल फूंका करते थे ।
पहले के समय में समाचार पत्र ,टीवी चैनल रेडियो आदि का अभाव हुआ करता था देश, प्रदेश ,नगर में घटने बड़ी वाली घटनाओं की
जानकारी यही से मिल जाती थी पास में स्थित एक पान की दुकान पर लोग दिन भर की चर्चा कर शहर की खबरों से रूबरू हो लेते थे । लेकिन शायद आज की युवा पीढ़ी को फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं है दो खम्बो पर आधारित विशालकाय दरवाजा खुद के ऐतिहासिक होने का भान करता रहता है ।
फिलहाल इन दिनों चौक स्थित घण्टाघर की घड़ी पिछले कई दिनों से खराब पड़ी है ऐसे में समय का आभास कराने वाली घड़ी का समय अव्यवस्थाओ के चलते थम सा गया ।
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