मजदूरों के लिए संक्रमण काल साबित हुआ बर्ष 2020, कोरोना महामारी से त्राहि-त्राहि
मजदूरों के लिए संक्रमण काल साबित हुआ बर्ष 2020, कोरोना महामारी से त्राहि-त्राहि !
*कोरोना बनाम मजदूर*
*लॉक डाउन ने तोड़ी कमर,भुखमरी की कगार पर मजदूर*।
भारत एक विकाशशील एवं प्रगतिशील देश है, लेकिन यह भी सच है कि भारत वह देश भी है जिसमे दैनिक वेतन मजदूरी करने वालो की संख्या सर्वाधिक हैं ।
देश के कोने-कोने में ही नही अपितु किसी भी राज्य अथवा शहर में आपको अन्तरजनपदीय मजदूर भारत मे मिलेंगे यही नही आपको अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पर भारतीय मजदूरों की एक टोली बड़ी संख्या में विभिन्न देशों में ढूढने पर मिल सकती हैं ।
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के संकट से देश ही नही बल्कि सम्पूर्ण विश्व जूझ रहा हैं। ऐसे में अभी तक इस महामारी की कोई ठोस दवाई या वैक्सीन उपचार के रूप में सामने नही आई है । विभिन्न देश बड़ी -बड़ी प्रयोगशालाओं में डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की मदद से इसके बचाव का इलाज तलाशने में जुटे हैं।
वही इस महामारी का एक तोड़ यह भी है कि आपसी सामाजिक दूरी बनाकर इस बीमारी को मात दी जा सकती है,और भारत मे ऐसा हुआ भी है लोग इलाज में ठीक भी हुए हैं । भारत मे बड़ी संख्या मजदूर वर्ग की लॉक डाउन लगने से कमर ही टूट गई दैनिक मजदूरी करने वालो के सामने बड़ा संकट उभर कर सामने आया हैं जो कि स्थानीय जिला प्रशासन व सरकारों के लिए बड़ी चुनौती है।
हालांकि सरकार भले ही मजदूरों के लिए बड़े बड़े दावे और वादे कर रही हो किन्तु इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
कुछ सरकारों द्वारा इन मजदूरों के लिए उचित कदम तक नही उठाते गए ।
जिसके एवज में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूरों को अन्य राज्यो से पलायन तक करना पड़ा। अगर स्थानीय सरकारें इन प्रवासी मजदूरों के प्रति थोड़ी भी संवेदनशील होती और उचित प्रबन्ध किया होता तो इन सभी को वहां से पलायन नही करना पड़ता ।
कुछ दिनों पूर्व सामने आई तश्वीरो से आपने हकीकत का अंदाजा बखूबी लगाया होगा जिस तरह से लोग पैदल अपने घरों की ओर निकल पड़े थे, और सैंकड़ो ही नही बल्कि हजारों किलो मीटर तक का सफर तय किया वह अकल्पनीय था ।
कोरोना महामारी में रिक्शा चालक ई रिक्शा टैक्सी चालक बढ़ई नाई जरदोजी, छपाई ठिलिया चालक पल्लेदार व खोंचा बिक्रेताओं फेरी बिक्रेता सहित तमाम ऐसे काम करने वाले लोग दैनिक मजदूर की श्रेणी में आते है ।
जिसका आंकड़ा लगाया जाना शायद बेहद मुश्किल होगा ।सरकार के पास केवल वे ही लोग चिन्हित है जो श्रम विभाग कार्यालय से पंजीकृत है, या जो मनरेगा के तहत मजदूरी का कार्य करते है।
*आत्महत्या भी कर सकते है मजदूर*
कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहे मजदूर भले ही कोरोना महामारी से बच जाए लेकिन अगर सरकार द्वारा इनके लिए कोई उचित कदम नही उठाया गया तो शायद यह मुफ़लसी की दुहाई देते-देते आर्थिक तंगी के चलते अपने परिवार का भरण पोषण करने में नाकामयाब साबित हो जिसके चलते इन पर कर्जा भी हो सकता है और अगर कर्ज नही मिल
नोट यह आलेख विश्व मजदूर दिवस पर लॉक डाउन के दौरान तैयार किया गया था ।
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