लंगड़ा,गूंगा,अंधा,बहरा मौन खड़ा हूँ मैं.......

 लंगड़ा,गूंगा,अंधा,बहरा

मौन खड़ा हूँ मैं....... 

सरकारी ताने  बाने से 

हड़ा पका हूँ मैं... 

क्यों ज़िद  करता हूँ... 

सरकारी दरबारों में...

हुई है आँखे पथरीली मेरी 

पढ़-पढ़ ये अखबारों में...

आज मिलेगा कल मिलेगा 

लाभ तुम्हे इस जीवन में... 

चीख उठी है आत्मा मेरी 

अरमानों की शय्या पर... 

नहीं-नहीं विश्वास रहा है..

नेता जी वाले भईया पर...

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