(दिलीप कश्यप )फर्रुखाबाद- शास्त्रीय संगीत में विश्व पटल पर फर्रुखाबाद घराने को पहचान दिलाने वाले
तबला वादक उस्ताद हाजी विलायत
देश के छह प्रसिद्ध तबला घरानों में से एक है फर्रुखाबाद घराने की मिठास के लोग दीवाने है यहां जन्मे तबला वादक उस्ताद हाजी विलायत अली ने तबला वादन में फर्रुखाबाद के
घराने के नाम से पहचान दिलाई तो वहीं
ठुमरी के सम्राट पण्डित ललन पिया ने अपनी ठुमरी में शब्दों के मोती पिरोकर संगीत के क्षेत्र में ठुमरी की से पहचान दिलाई संगीत के इन ठुमरी पाण्डित्य और उस्ताद को अब लोग भुलाते जा रहे हैं ।
दुर्भाग्य बस कहना पड़ रहा है कि शायद जिन महान व्यक्तित्व से पूरे फर्रुखाबाद के संगीत मण्डली को गर्व होता है उन्ही के शहर में आज वह अनजाने बेगाने नजर आ रहे है यही नहीं जिस प्रकार से युवा पीढ़ी इन उनके इतिहास योगदान से अपरिचित और विमुख यह एक असहनीय पीड़ा के समान है ।
आने वाले समय में इनकी विरासत को संजोने वाले तक नहीं दिख रहे । वही आरोप है कि जिले के संगीत अनुरागियों एवं छात्रों के लिए जिला प्रसाशन द्वारा उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।
बताया जाता है कि पं श्याम सुंदर गौड के पुत्र पं काली चरण गौड की मृत्यु के पश्चात् कोई तबला वादक नगर मे नहीं है। ललन पिया की शैली को जीवित रखने वाली सुश्री पुष्प लता रस्तोगी की अवस्था भी अब 81 वर्ष की है। इनके शिष्य डॉ विद्या प्रकाश दीक्षित अब उत्तराखंड प्रवासी हो गए हैं। नई पीढ़ी मे श्री आकर्ष शुक्ला भी दिल्ली प्रवास पर रहते है। इस प्रकार नगर फर्रुखाबाद अपनी धरोहर को सहेजने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा। अब तक दो प्रमुख आयोजनों - मेला रामनगरिया के सांस्कृतिक पंडाल और फर्रुखाबाद महोत्सव के आयोजकों ने फर्रुखाबाद घराने के प्रतिनिधित्व पर ध्यान नहीं दिया जबकि इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी पुरातन धरोहर से अवगत कराना होता है।
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